कुछ पर्सनल लोन, टू-व्हीलर लोन और घरेलू सामान के लोन सस्ती दिखने वाली फ़्लैट दर पर दिए जाते हैं। फ़्लैट दर में पूरी अवधि तक ब्याज पूरी लोन राशि पर लगता है, भले ही आप हर महीने उसका कुछ हिस्सा चुका रहे हों। घटते बैलेंस वाली दर, जो सिर्फ़ बचे हुए बकाए पर ब्याज लेती है, असली ख़र्च बताती है। यह कैलकुलेटर एक को दूसरे में बदलता है।
कैलकुलेटर कैसे इस्तेमाल करें
- लोन राशि डालें।
- लोन देने वाले की बताई फ़्लैट ब्याज दर डालें।
- अवधि साल में डालें।
यह कैसे काम करता है
कुल ब्याज (फ़्लैट) = लोन × फ़्लैट दर × साल ÷ 100
EMI = (लोन + कुल ब्याज) ÷ कुल महीने
फिर कैलकुलेटर वह घटते बैलेंस वाली दर ढूँढता है जिस पर उसी लोन की EMI बिल्कुल यही होती। वही आपकी असली दर है।
उदाहरण
₹1,00,000 का लोन, 10% फ़्लैट दर पर, 3 साल के लिए:
- कुल ब्याज = 1,00,000 × 10% × 3 = ₹30,000
- EMI = 1,30,000 ÷ 36 = ₹3,611
- असली घटते बैलेंस वाली दर = 17.92% सालाना
फ़्लैट दर बनाम असली दर
| फ़्लैट दर | अवधि | असली घटती दर |
|---|---|---|
| 8% | 3 साल | 14.55% |
| 10% | 3 साल | 17.92% |
| 10% | 5 साल | 17.27% |
| 12% | 5 साल | 20.31% |
मोटे तौर पर असली दर फ़्लैट दर की लगभग 1.7 से 1.9 गुना होती है।
अपना बचाव करें
- घटते बैलेंस वाली दर या APR पूछें। RBI के नियम के अनुसार बैंक और NBFC को रिटेल लोन के लिए की फ़ैक्ट्स स्टेटमेंट (KFS) देना होता है, जिसमें सालाना प्रतिशत दर (APR) लिखी होती है।
- दरों की नहीं, EMI की तुलना करें। एक ही रकम और अवधि पर जिस लोन की EMI कम है, वही सस्ता है।
- फ़ीस देखें। प्रोसेसिंग फ़ीस और दूसरे चार्ज असली ख़र्च और बढ़ा देते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
फ़्लैट ब्याज दर क्या है?
यह पूरी अवधि तक मूल लोन राशि पर लगने वाली दर है, जो चुकाने के साथ घटती नहीं। इससे लोन असल से सस्ता दिखता है।
घटते बैलेंस वाली दर क्या है?
यह हर महीने सिर्फ़ बचे हुए बकाए पर लगने वाली दर है। होम लोन और ज़्यादातर बैंक लोन इसी तरीके से चलते हैं।
फ़्लैट दर को घटती दर में कैसे बदलें?
लोन की जानकारी कैलकुलेटर में डालें। वह उसी EMI वाली घटती दर निकाल देगा। मोटे तौर पर फ़्लैट दर को लगभग 1.8 से गुणा करें।
उधार लेने वाले के लिए कौन सी बेहतर है?
एक ही नंबर पर घटते बैलेंस वाली दर हमेशा सस्ती है। असली दर या EMI कैलकुलेटर से EMI की तुलना करके ऑफ़र चुनें।