महँगाई (इन्फ़्लेशन) कैलकुलेटर

जानें कि भविष्य में किसी चीज़ की क़ीमत कितनी होगी और महँगाई के बाद आज के पैसे की असली क़ीमत कितनी रह जाएगी।

₹
%
साल

नतीजा

भविष्य की क़ीमत
—
तब इस रकम की असली क़ीमत
—
क़ीमत में बढ़ोतरी
—

क़ीमत कैसे बढ़ती है

महँगाई (इन्फ़्लेशन) यानी समय के साथ क़ीमतों का लगातार बढ़ना। यह चुपचाप आपके पैसे की ख़रीदने की ताक़त घटा देती है। आज बेकार पड़े ₹1 लाख से दस साल बाद बहुत कम सामान ख़रीदा जा सकेगा। यह कैलकुलेटर एक ही असर के दोनों पहलू दिखाता है: भविष्य में चीज़ों की क़ीमत कितनी होगी, और तब आज के पैसे की असली क़ीमत कितनी रह जाएगी।

महँगाई कैलकुलेटर कैसे इस्तेमाल करें

  1. आज की रकम या क़ीमत डालें, जैसे मासिक बजट, स्कूल फ़ीस या आपकी बचत।
  2. अनुमानित महँगाई दर डालें।
  3. कितने साल बाद का हिसाब चाहिए, वह डालें।

आपको भविष्य की क़ीमत, क़ीमत में बढ़ोतरी, और अवधि के अंत में उसी रकम की असली क़ीमत दिखेगी।

महँगाई के फ़ॉर्मूले

भविष्य की क़ीमत    = आज की क़ीमत × (1 + महँगाई ÷ 100)^साल
असली क़ीमत        = आज की रकम ÷ (1 + महँगाई ÷ 100)^साल

उदाहरण

6% महँगाई पर 10 साल बाद:

  • जो चीज़ आज ₹1,00,000 की है, वह लगभग ₹1,79,085 की होगी
  • आज अलग रखे ₹1,00,000 से उतना ही ख़रीदा जा सकेगा जितना आज लगभग ₹55,839 से

समय के साथ क़ीमतें कैसे बढ़ती हैं

₹1,00,000, 6% महँगाई पर:

सालभविष्य की क़ीमत₹1 लाख की असली क़ीमत
5₹1,33,823₹74,726
10₹1,79,085₹55,839
20₹3,20,714₹31,180
30₹5,74,349₹17,411

6% पर क़ीमतें लगभग हर 12 साल में दोगुनी हो जाती हैं (72 ÷ 6 = 12)। जो परिवार आज हर महीने ₹50,000 ख़र्च करता है, उसे 25 साल बाद उसी रहन-सहन के लिए लगभग ₹2,14,594 महीना चाहिए होंगे।

आपके पैसे के लिए यह क्यों ज़रूरी है

  • बचत को महँगाई से आगे रहना चाहिए। अगर बचत पर 6% मिलता है और महँगाई भी 6% है, तो असल में आपका पैसा नहीं बढ़ रहा। FD कैलकुलेटर देखें और उसके रिटर्न की महँगाई से तुलना करें।
  • लक्ष्य सोच से ज़्यादा महँगे होते हैं। पढ़ाई और इलाज का ख़र्च अक्सर आम महँगाई से तेज़ बढ़ा है। लक्ष्य SIP कैलकुलेटर से भविष्य की रकम में योजना बनाएँ।
  • रिटायरमेंट दशकों चलता है। काम बंद होने के बाद भी ख़र्च बढ़ते रहते हैं। रिटायरमेंट कैलकुलेटर पूरी रिटायरमेंट अवधि की महँगाई जोड़ता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

कितनी महँगाई दर मानकर चलें?

लंबे समय में भारत में उपभोक्ता महँगाई अक्सर लगभग 4–7% सालाना रही है। कई लोग 6% मानकर योजना बनाते हैं। पढ़ाई या इलाज के ख़र्च के लिए 8–10% जैसी ऊँची दर मानना ज़्यादा सुरक्षित है।

पर्चेज़िंग पावर (ख़रीदने की ताक़त) क्या है?

यह बताती है कि आपके पैसे से असल में कितना ख़रीदा जा सकता है। क़ीमतें बढ़ने पर उतने ही रुपयों से कम सामान आता है, यानी ख़रीदने की ताक़त घट जाती है।

किसी निवेश का असली रिटर्न कैसे निकालें?

मोटे तौर पर रिटर्न में से महँगाई घटा दें। 7% वाली FD और 6% महँगाई पर असली रिटर्न लगभग 1% है। सटीक आँकड़े के लिए (1 + रिटर्न) ÷ (1 + महँगाई) − 1 इस्तेमाल करें।

क्या महँगाई नेगेटिव हो सकती है?

हाँ। क़ीमतें घटने को डिफ़्लेशन कहते हैं। भारत में यह लंबे समय तक कम ही होता है। कम महँगाई वाली स्थितियाँ देखने के लिए आप छोटी दर डाल सकते हैं।