RD कैलकुलेटर

जानें कि हर महीने की रिकरिंग डिपॉज़िट मैच्योरिटी पर कितनी होगी।

₹
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साल

नतीजा

मैच्योरिटी राशि
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कुल जमा
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कुल ब्याज
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  • कुल जमा—
  • कुल ब्याज—

सालों के साथ बढ़त

रिकरिंग डिपॉज़िट (RD) में आप बैंक या पोस्ट ऑफ़िस में हर महीने एक तय रकम जमा करते हैं और तय ब्याज कमाते हैं। यह SIP की तरह बचत की आदत बनाता है, लेकिन FD की तरह पक्का रिटर्न देता है। छुट्टियों, किसी गैजेट या इमरजेंसी फंड जैसे छोटे लक्ष्यों के लिए यह अच्छा विकल्प है।

RD कैलकुलेटर कैसे इस्तेमाल करें

  1. हर महीने की जमा रकम डालें।
  2. सालाना ब्याज दर डालें।
  3. अवधि साल में चुनें।

आपको कुल जमा, कुल ब्याज और मैच्योरिटी राशि दिखेगी। साल-दर-साल हिसाब में देखें कि रकम कैसे बढ़ती है।

RD पर ब्याज कैसे निकलता है

बैंक और पोस्ट ऑफ़िस RD पर ब्याज हर तिमाही जोड़ते हैं। हर महीने की किस्त उतने समय का ब्याज कमाती है जितने समय वह खाते में रहती है: पहली किस्त पूरी अवधि का, और आख़िरी किस्त सिर्फ़ एक महीने का। मैच्योरिटी राशि सभी किस्तों और उनके ब्याज का जोड़ है:

मैच्योरिटी = Σ R × (1 + r ÷ 400)^(m ÷ 3)
  • R = हर महीने की जमा
  • r = सालाना ब्याज दर (%)
  • m = वह किस्त कितने महीने जमा रही (पूरी अवधि से घटकर 1 तक)

उदाहरण

आप हर महीने ₹5,000 5 साल तक 7% पर जमा करते हैं।

  • कुल जमा = ₹5,000 × 60 = ₹3,00,000
  • मैच्योरिटी राशि = ₹3,59,664
  • कुल ब्याज = ₹59,664

इसी दर पर ₹2,000 महीने की छोटी RD 5 साल में ₹1,43,866 हो जाती है।

RD बनाम FD

अगर ₹3,00,000 पहले से हाथ में हों, तो 7% पर 5 साल की FD (तिमाही कंपाउंडिंग) लगभग ₹4,24,433 हो जाती है। उतनी ही कुल रकम पर RD कम ब्याज कमाती है, क्योंकि ज़्यादातर पैसा बाद में जमा होता है। RD उनके लिए है जो हर महीने की आमदनी से बचाते हैं, और FD उस रकम के लिए जो पहले से आपके पास है। FD कैलकुलेटर देखें।

जानने लायक बातें

  • RD का ब्याज टैक्सेबल है और आपके स्लैब रेट पर टैक्स लगता है। बैंक इस पर TDS भी काट सकते हैं।
  • किस्त छूटने पर आमतौर पर छोटी पेनल्टी लगती है। कई किस्तें छूटने पर खाता बंद हो सकता है।
  • पोस्ट ऑफ़िस RD की अवधि 5 साल तय है और इसकी दर सरकार हर तिमाही तय करती है।
  • समय से पहले बंद करने की सुविधा आमतौर पर कम ब्याज के साथ मिलती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

RD पर ब्याज कैसे निकाला जाता है?

ब्याज हर तिमाही जुड़ता है। हर महीने की जमा उस महीने से मैच्योरिटी तक ब्याज कमाती है, इसलिए पहले की किस्तें बाद वाली किस्तों से ज़्यादा ब्याज कमाती हैं।

क्या RD का ब्याज टैक्सेबल है?

हाँ। यह आपकी आमदनी में जुड़कर स्लैब रेट पर टैक्सेबल है, और साल का ब्याज तय सीमा से ज़्यादा होने पर TDS कट सकता है।

RD की किस्त छूट जाए तो क्या होगा?

ज़्यादातर बैंक देर से जमा पर छोटी पेनल्टी लेते हैं। लगातार कई किस्तें छूटने पर बैंक RD बंद करके ब्याज समेत पैसा लौटा सकता है।

RD बेहतर है या SIP?

RD तय और पक्का रिटर्न देती है, जो छोटे लक्ष्यों के लिए सही है। इक्विटी म्यूचुअल फंड में SIP लंबे समय में ज़्यादा रिटर्न दे सकती है, लेकिन बाज़ार के जोखिम के साथ। SIP कैलकुलेटर से तुलना करें।